गर्मी से बचने के लिए कई ज्यादातर लोग अपने घरों और ऑफिस में एयर कंडीशनर (AC) लगवाना चाहते हैं। हालांकि, एसी का बिल लोगों का बजट बिगाड़ देता है। 5 स्टार रेटिंग वाले एसी भी बिजली का बिल उतना कम नहीं कर पाते। ऐसे में बिजली के बिल की टेंशन को खत्म करने के लिए सोलर एयर कंडीशनर बेस्ट ऑप्शन बन सकता है। ये एसी सोलर प्लेट की मदद से चलते हैं।

सोलर एसी को 1 टन, 1.5 टन और 2 टन कैपेसिटी में खरीदा जा सकता है। यानी कमरे के साइज और जरूरत को देखते हुए इन AC का यूज किया जा सकता है। इनकी कीमत इलेक्ट्रिक एसी की तुलना में ज्यादा होती है, लेकिन बिजली के खर्च को देखते हुए ये सस्ते होते हैं। ये आपका बिजली बिल 90% तक कम कर देंगे।

सोलर एसी की कीमत

भारतीय बाजार में अब सोलर एसी को बनाने वाली कई कंपनियां हैं। इन सभी कंपनियों के एसी की कीमतें लगभग बराबर होती हैं। यानी इनमें ज्यादा अंतर नहीं होता। कंपनी एसी के साथ सोलर प्लेट, इन्वर्टर, बैटरी और इसकी इंस्टॉलेशन से जुड़ा दूसरा सामान साथ देती है। 1 टन के सोलर ऐसी को चलाने के लिए कम से कम 1500 वाट के सोलर पनेल्स कि जरूरत होगी जिसकी कीमत लगभग 1 लाख तक आती है| इसी प्रकार 1.5 टन के लिए 1.5 लाख तथा 2 टन के सोलर ऐसी के लिए 2 लाख तक का ही खर्च होता है|

इतने रुपए तक हो सकती है सेविंग

भारतीय मार्केट में बिजली से चलने वाले AC की बड़ी रेंज मौजूद है। इनमें 2 स्टार से लेकर 5 स्टार रेटिंग वाले AC शामिल हैं। 2 स्टार का बिजली बिल ज्यादा आता है, तो वहीं 5 स्टार का कम। यदि AC 2 स्टार है तब वो सिर्फ एक रात में 8 से 10 यूनिट की खपत करता है। यानी महीने में 250 से 300 यूनिट की खर्च होंगी। वहीं, 5 स्टार AC महीनेभर में करीब 200 यूनिट खर्च करता है।

यदि आपके शहर में 1 यूनिट बिजली की कीमत करीब 7 रुपए है। AC से 300 यूनिट की खपत होती है तब बिजली बिल में कम से कम 2,100 रुपए का जुड़ जाएंगे। बचत इस बात पर भी निर्भर है कि आप इलेक्ट्रिक AC एक दिन में कितना यूज करते हैं।

सोलर एसी इस तरह करते हैं काम

सोलर एसी के टन के हिसाब से सोलर पनेल्स को इन्स्टॉल किया जाता है। जैसे 1 टन वाले सोलर एसी के साथ 1500 वॉट के सोलर पनेल्स लगाए जाते हैं। पनेल्स को इन्वर्टर और बैटरी से जोड़ा जाता है। धूप से सोलर पनेल्स ऊर्जा तैयार करते हैं उससे बैटरी चार्ज होती है। इन्हीं बैटरी की मदद से एसी चलता है। क्योंकि ये इन्वर्टर एसी होते हैं तो आसानी से बैटरी से चल जाते हैं। यदि कभी मौसम खराब होता है तब इन्हें बिजली से भी चलाया जा सकता है।